Hindi love poems …(थोड़ी सी नमी) | Hindi kavya sangrah..

थोड़ी सी नमी……

आँखों में है मेरी जो थोड़ी सी नमी

क्या बताऊँ तुम्हें बस हैं तुम्हारी ही कमी

याद करके तुम्हें नहीं थकता है ये दिल

या खुदा आई है ये कैसी मुश्किल

तुम्हारी आँखों का वो छलकता पानी

लफ्ज़ निकलते थे जो तुम्हारी ज़ुबानी

आज भी याद हैं मुझे वो सुबह और शाम

जो मैं करता था सिर्फ तेरे ही नाम

वक़्त आया लेकर क्या कहर

तेरे बिना जीना हो गया ये ज़हर

तू ही मेरी आँखों में मेरे ख्वाबों में है

तू ही कुछ सवालों में कुछ जवाबों में है

याद करता है तुझही को ये मेरा दिल

कभी आकर तू भी मुझसे यूं ही मिल

तोहफे में दूंगा तुझको ये ज़मीं ये आसमां

तू ही तो है मेरे लिये सारा जहाँ….
 
Hindi love poems ...(थोड़ी सी नमी) | Hindi kavya sangrah..
Hindi love poems …(थोड़ी सी नमी) | Hindi kavya sangrah..
 

Comments

comments